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Happy Mother's Day

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एक प्यारी सी कहानी दिल से एक बच्चे ने भगवान् से पूछा मैंने सुना आप मुझे धरती पे बेहज रहे है लकिन मैं वह कैसे रहुगा छोटा सा अकेला असाहय? भगवान् जी  ने कहा  "आपका  फ़रिश्ता वहाँ  आपका  इंतजार कर रहा है और वो आपका ख्याल रखेगा। "(ऐसा कह कर भगवान् मुस्कुराये ) बच्चे ने फिर से पूछा  "भगवान् जी मुझे बताओ,मैं यहाँ स्वर्ग में  मुझे कुछ नहीं करना होता मैं गाता हूँ,  मुस्कुराता हूँ और खुश रहता हूँ।" भगवान् जी  ने मुस्कुराते हुए कहा "बच्चे,आप के लिए वो फ़रिश्ता गाएगा और मुस्कुरायेंगे । और आप अपने फ़रिश्ते के प्यार को महसूस  करेंगे , बहुत खुश रहेंगे।" बच्चे ने फिर से पूछा "मैं उनकी भाषा नहीं जनता में कैसे समझुगा कि वो मुझे से क्या बात कर रहे है ।" भगवान् जी ने कहा  "आपका फ़रिश्ता आपको सबसे सुन्दर व प्यारे शब्द बोलेगा और आपकी प्यार से देखभाल करेगा।  आपको बोलना भी सिखाएगा।" बच्चे ने कहा " मैं कब क्या करने वाला हूँ और कब मैं बात करना चाहता हूँ,कैसे पता चलेगा?" भगवान् जी ने कहा "आपका फ़रिश्ता आपको अपने दोनों हाथ जोड़ना और प्रा...

WHEN YOUR CHILDREN DESIRE TO TALK TO YOU AND SHARE THEIR PROBLEMS WITH YOU, STOP EVERYTHING AND LISTEN TO THEM. THERE IS NOTHING IMPORTANT THAN THAT...

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WHEN YOUR CHILDREN DESIRE TO TALK TO YOU AND SHARE THEIR PROBLEMS WITH YOU, STOP EVERYTHING AND LISTEN TO THEM. THERE IS NOTHING IMPORTANT THAN THAT... “Listen earnestly to anything your children want to tell you, no matter what. If you don’t listen eagerly to the little stuff when they are little, they won’t tell you the big stuff when they are big, because to them all of it has always been big stuff.” In today's world,parenting is tough. And no matter how many books you read, or parenting workshops you attend, you’re going to make mistakes. We are imperfect parents in an imperfect world. That said, we often overcompensate in our parenting. We try to give our kids every material provision we imagine they need. We attend every sporting event, recital, and school program. We send them to the best schools, give them every opportunity we didn’t have as children, and then wonder WHY they are so unhappy. Or anxious. Or lonely. As parents, we end up confused, frust...

तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय, कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।

तिनका कबहुँ ना निन्दिये , जो पाँवन तर होय , कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े , तो पीर घनेरी होय। अर्थ : कबीर कहते हैं कि एक छोटे से तिनके की भी कभी निंदा न करो जो तुम्हारे पांवों के नीचे दब जाता है . यदि कभी वह तिनका उड़कर आँख में आ गिरे तो कितनी गहरी पीड़ा होती है ! मैं आप लोगों को एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ।   ' आओ , हम लोग एक दूसरे को बुरा कहना बंद कर दें ', और उन्हे इस बात का बड़ा खेद हैं कि लोगों में सदा इतना मतभेद क्यों रहता हैं । परन्तु मैं समझता हूँ कि जो कहानी मैं सुनाने वाला हूँ , उससे आप लोगों को इस मतभेद का कारण स्पष्ट हो जाएगा । एक कुएँ में बहुत समय से एक मेढ़क रहता था । वह वहीं पैदा हुआ था और वहीं उसका पालन - पोषण हुआ , पर फिर भी वह मेढ़क छोटा ही था । धीरे - धीरे यह मेढ़क उसी कुएँ में रहते रहते मोटा और चिकना हो गया । अब एक दिन एक दूसरा मेढ़क , जो समुद्र में रहता था , वहाँ आया और कुएँ में गिर पड़ा । ...